बुधवार, 11 जनवरी 2012

'माली'



सींच रहे हो,
बगिया को-
और उसकी क्यारियों को -
बर्षों से-
आजमाई -
‘तुष्टि’ खाद,
‘बिभक्ति’ खाद,
‘केमिकल’ खाद,
किसम किसम की और भी खाद,
ऊपर से - इम्पोर्टेड खाद.

बगिया !
फिर भी बर्बाद .
‘घटिया’, घटती ‘पैदावार’,
बढती जाती 'खरपतवार',
बदले 'मालिक'
'माली' बदले
फिर वही -फटे हाल,
और पडौसी –
फटाफट आबाद.

'माली' ! !
सुन - पते की बात,
अबकी आजमा --
'अन्ना' खाद .
कम होगी- ‘खरपतवार’,

और बढ़ेगी ‘पैदावार’ l
फिर होगी, बगिया आबाद.

19 टिप्‍पणियां:

  1. कविता अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट "लेखनी को थाम सकी इसलिए लेखन ने मुझे थामा": पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद। .

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  2. कविता अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट "लेखनी को थाम सकी इसलिए लेखन ने मुझे थामा": पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद। .

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  3. वास्तव में आज देश को अन्ना खाद की शख्त जरूरत है. आपके विचार देश हित में अति उत्तम है.

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  4. बहुत अच्छी सुंदर प्रस्तुति,बढ़िया अभिव्यक्ति रचना अच्छी लगी.....
    new post--काव्यान्जलि : हमदर्द.....

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  5. बगिया !
    फिर भी बर्बाद .
    ‘घटिया’, घटती ‘पैदावार’,
    बढती जाती 'खरपतवार',
    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ! गहरे भाव और अभिव्यक्ति के साथ उम्दा प्रस्तुती!

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  6. संजय जी . आपके शब्दों हेतु आभार. स्नेह बनाए रखें.

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  8. केवल जी नमस्कार,
    पूर्व में अजमाई हैं खादें बहुत सी,
    वो सभी निकलीं बहुत ही हानिकारक।
    शेष अन्ना खाद ही शायद बची है,
    आजमाकरके इसे भी देखते है।
    क्या यही गणतंत्र है

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  9. आगामी शुक्रवार को चर्चा-मंच पर आपका स्वागत है
    आपकी यह रचना charchamanch.blogspot.com पर देखी जा सकेगी ।।

    स्वागत करते पञ्च जन, मंच परम उल्लास ।

    नए समर्थक जुट रहे, अथक अकथ अभ्यास ।



    अथक अकथ अभ्यास, प्रेम के लिंक सँजोए ।

    विकसित पुष्प पलाश, फाग का रंग भिगोए ।


    शास्त्रीय सानिध्य, पाइए नव अभ्यागत ।

    नियमित चर्चा होय, आपका स्वागत-स्वागत ।।

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  10. आप सभी का धन्यवाद,
    रविकर जी, आभार एवं स्वागतम.

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  11. आदरणीय, शास्त्री जी,
    आपके आशीर्वाद की अपेक्षा थी - आभार.

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  12. वाह|||
    बहूत हि अच्छा लिखा है आपने..
    बेहतरीन रचना....

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  13. माननीया, रीना जी, धन्यवाद.

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  14. 'माली' ! !
    सुन - पते की बात,
    अबकी आजमा --
    'अन्ना' खाद .
    कम होगी- ‘खरपतवार’,

    WAH KYA KHOOB LIKHA HAI APNE ...SADAR BADHAI.

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