रविवार, 28 दिसंबर 2014

‘नव सृजन’


‘नव सोच’ सिंचित,
‘नव सृजन’ हो हरित,
हर ‘मन उपवन’ में,
‘नव उल्लास’,
उमंग नव ’ हो पल्लवित,
हर ‘घर आगन’ में.

रहें दूर अवसाद कुटिल, कुलसित,
हर ‘तन मन’ से,
हों नष्ट अज्ञान, अनीति, दुःखदारिद्र,
‘जन गण’ से.

बहे सुनीति, ‘सुख शांति’ की फुहार,
हर डगर में,
‘नव वर्ष’ ! लाए, आनन्द-बहार,
सर्वत्र विश्वभर में.

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